ब्राह्मणोंने सन्तुष्ट होकर अत्यन्त विनयी युधिष्ठिरसे कहा—‘पुरुवंशशिरोमणे! कालकी दुर्निवार गतिसे यह पवित्र पुरुवंश मिटना ही चाहता था, परन्तु तुमलोगोंपर कृपा करनेके लिये भगवान् विष्णुने यह बालक देकर इसकी रक्षा कर दी॥ १५-१६॥
यह अर्थ श्लोक 15–16 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
दैवेनाप्रतिघातेन शुक्ले संस्थामुपेयुषि।
रातो वोऽनुग्रहार्थाय विष्णुना प्रभविष्णुना॥ १६
ब्राह्मणोंने सन्तुष्ट होकर अत्यन्त विनयी युधिष्ठिरसे कहा—‘पुरुवंशशिरोमणे! कालकी दुर्निवार गतिसे यह पवित्र पुरुवंश मिटना ही चाहता था, परन्तु तुमलोगोंपर कृपा करनेके लिये भगवान् विष्णुने यह बालक देकर इसकी रक्षा कर दी॥ १५-१६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 137) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/12/16/