श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.2

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्य जन्म महाबुद्धेः कर्माणि च महात्मनः।

निधनं च यथैवासीत्स प्रेत्य गतवान् यथा॥ २

tasya janma mahābuddheḥ karmāṇi ca mahātmanaḥ|

nidhanaṃ ca yathaivāsītsa pretya gatavān yathā|| 2

अर्थ

उस गर्भसे पैदा हुए महाज्ञानी महात्मा परीक्षित‍्के, जिन्हें शुकदेवजीने ज्ञानोपदेश दिया था, जन्म, कर्म, मृत्यु और उसके बाद जो गति उन्हें प्राप्त हुई, वह सब यदि आप ठीक समझें तो कहें; हमलोग बड़ी श्रद्धाके साथ सुनना चाहते हैं॥ २-३॥✎ 85

यह अर्थ श्लोक 2–3 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #85 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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