श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.3

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तदिदं श्रोतुमिच्छामो गदितुं यदि मन्यसे।

ब्रूहि नः श्रद्दधानानां यस्य ज्ञानमदाच्छुकः॥ ३

tadidaṃ śrotumicchāmo gadituṃ yadi manyase|

brūhi naḥ śraddadhānānāṃ yasya jñānamadācchukaḥ|| 3

अर्थ

उस गर्भसे पैदा हुए महाज्ञानी महात्मा परीक्षित‍्के, जिन्हें शुकदेवजीने ज्ञानोपदेश दिया था, जन्म, कर्म, मृत्यु और उसके बाद जो गति उन्हें प्राप्त हुई, वह सब यदि आप ठीक समझें तो कहें; हमलोग बड़ी श्रद्धाके साथ सुनना चाहते हैं॥ २-३॥✎ 85

यह अर्थ श्लोक 2–3 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #85 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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