श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.46

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

अहस्तानि सहस्तानामपदानि चतुष्पदाम्।

फल्गूनि तत्र महतां जीवो जीवस्य जीवनम्॥ ४६

ahastāni sahastānāmapadāni catuṣpadām|

phalgūni tatra mahatāṃ jīvo jīvasya jīvanam|| 46

अर्थ

हाथवालोंके बिना हाथवाले, चार पैरवाले पशुओंके बिना पैरवाले (तृणादि) और उनमें भी बड़े जीवोंके छोटे जीव आहार हैं। इस प्रकार एक जीव दूसरे जीवके जीवनका कारण हो रहा है॥ ४६॥✎ 91

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #91 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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