हाथवालोंके बिना हाथवाले, चार पैरवाले पशुओंके बिना पैरवाले (तृणादि) और उनमें भी बड़े जीवोंके छोटे जीव आहार हैं। इस प्रकार एक जीव दूसरे जीवके जीवनका कारण हो रहा है॥ ४६॥✎ 91
अहस्तानि सहस्तानामपदानि चतुष्पदाम्।
फल्गूनि तत्र महतां जीवो जीवस्य जीवनम्॥ ४६
हाथवालोंके बिना हाथवाले, चार पैरवाले पशुओंके बिना पैरवाले (तृणादि) और उनमें भी बड़े जीवोंके छोटे जीव आहार हैं। इस प्रकार एक जीव दूसरे जीवके जीवनका कारण हो रहा है॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 144) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/13/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)