अब वे देवताओंका कार्य पूरा कर चुके हैं। थोड़ा-सा काम और शेष है, उसीके लिये वे रुके हुए हैं। जबतक वे प्रभु यहाँ हैं तबतक तुमलोग भी उनकी प्रतीक्षा करते रहो॥ ४९॥✎ 91
निष्पादितं देवकृत्यमवशेषं प्रतीक्षते।
तावद् यूयमवेक्षध्वं भवेद् यावदिहेश्वरः॥ ४९
अब वे देवताओंका कार्य पूरा कर चुके हैं। थोड़ा-सा काम और शेष है, उसीके लिये वे रुके हुए हैं। जबतक वे प्रभु यहाँ हैं तबतक तुमलोग भी उनकी प्रतीक्षा करते रहो॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 144) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/13/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)