धर्मराज! आजसे पाँचवें दिन वे अपने शरीरका परित्याग कर देंगे और वह जलकर भस्म हो जायगा॥ ५६॥✎ 92
स वा अद्यतनाद् राजन् परतः पञ्चमेऽहनि।
कलेवरं हास्यति स्वं तच्च भस्मीभविष्यति॥ ५६
धर्मराज! आजसे पाँचवें दिन वे अपने शरीरका परित्याग कर देंगे और वह जलकर भस्म हो जायगा॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 145) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/13/56/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)