यदुवंशी वीर श्रीकृष्णके बाहुदण्डके प्रभावसे सुरक्षित रहकर निर्भय रहते हैं और बलपूर्वक लायी हुई बड़े-बड़े देवताओंके बैठने योग्य सुधर्मा सभाको अपने चरणोंसे आक्रान्त करते हैं॥ ३८॥
यद्बाहुदण्डाभ्युदयानुजीविनो यदुप्रवीरा ह्यकुतोभया मुहुः।
अधिक्रमन्त्यङ्घ्रिभिराहृतां बलात् सभां सुधर्मां सुरसत्तमोचिताम्॥ ३८
यदुवंशी वीर श्रीकृष्णके बाहुदण्डके प्रभावसे सुरक्षित रहकर निर्भय रहते हैं और बलपूर्वक लायी हुई बड़े-बड़े देवताओंके बैठने योग्य सुधर्मा सभाको अपने चरणोंसे आक्रान्त करते हैं॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 149) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/38/