॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.18.26
प्रतिरुद्धेन्द्रियप्राणमनोबुद्धिमुपारतम् ।
स्थानत्रयात्परं प्राप्तं ब्रह्मभूतमविक्रियम्॥ २६
pratiruddhendriyaprāṇamanobuddhimupāratam |
sthānatrayātparaṃ prāptaṃ brahmabhūtamavikriyam|| 26
अर्थ
इन्द्रिय, प्राण, मन और बुद्धिके निरुद्ध हो जानेसे वे संसारसे ऊपर उठ गये थे। जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति—तीनों अवस्थाओंसे रहित निर्विकार ब्रह्मरूप तुरीय पदमें वे स्थित थे॥ २६॥