श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.33

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अहो अधर्मः पालानां पीन्‍नां बलिभुजामिव।

स्वामिन्यघं यद् दासानां द्वारपानां शुनामिव॥ ३३

aho adharmaḥ pālānāṃ pīnnāṃ balibhujāmiva|

svāminyaghaṃ yad dāsānāṃ dvārapānāṃ śunāmiva|| 33

अर्थ

‘ये नरपति कहलानेवाले लोग उच्छिष्टभोजी कौओंके समान संड-मुसंड होकर कितना अन्याय करने लगे हैं! ब्राह्मणोंके दास होकर भी ये दरवाजेपर पहरा देनेवाले कुत्तेके समान अपने स्वामीका ही तिरस्कार करते हैं ॥ ३३॥

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