उन शमीक मुनिका पुत्र बड़ा तेजस्वी था। वह दूसरे ऋषिकुमारोंके साथ पास ही खेल रहा था। जब उस बालकने सुना कि राजाने मेरे पिताके साथ दुर्व्यवहार किया है, तब वह इस प्रकार कहने लगा—॥ ३२॥
तस्य पुत्रोऽतितेजस्वी विहरन् बालकोऽर्भकैः।
राज्ञाघं प्रापितं तातं श्रुत्वा तत्रेदमब्रवीत्॥ ३२
उन शमीक मुनिका पुत्र बड़ा तेजस्वी था। वह दूसरे ऋषिकुमारोंके साथ पास ही खेल रहा था। जब उस बालकने सुना कि राजाने मेरे पिताके साथ दुर्व्यवहार किया है, तब वह इस प्रकार कहने लगा—॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 172) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/18/32/