॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.18.31
एष किं निभृताशेषकरणो मीलितेक्षणः।
मृषासमाधिराहोस्वित्किं नु स्यात्क्षत्रबन्धुभिः॥ ३१
eṣa kiṃ nibhṛtāśeṣakaraṇo mīlitekṣaṇaḥ|
mṛṣāsamādhirāhosvitkiṃ nu syātkṣatrabandhubhiḥ|| 31
अर्थ
उनके मनमें यह बात आयी कि इन्होंने जो अपने नेत्र बंद कर रखे हैं, सो क्या वास्तवमें इन्होंने अपनी सारी इन्द्रियवृत्तियोंका निरोध कर लिया है अथवा इन राजाओंसे हमारा क्या प्रयोजन है, यों सोचकर इन्होंने झूठ-मूठ समाधिका ढोंग रच रखा है॥ ३१॥