॥ श्रीहरिः ॥
स वा आङ्गिरसो ब्रह्मन् श्रुत्वा सुतविलापनम्।
उन्मील्य शनकैर्नेत्रे दृष्ट्वा स्वांसे मृतोरगम्॥ ३९
sa vā āṅgiraso brahman śrutvā sutavilāpanam|
unmīlya śanakairnetre dṛṣṭvā svāṃse mṛtoragam|| 39
अर्थ
विप्रवर शौनकजी! शमीक मुनिने अपने पुत्रका रोना-चिल्लाना सुनकर धीरे-धीरे अपनी आँखें खोली और देखा कि उनके गलेमें एक मरा साँप पड़ा है ॥ ३९॥
स वा आङ्गिरसो ब्रह्मन् श्रुत्वा सुतविलापनम्।
उन्मील्य शनकैर्नेत्रे दृष्ट्वा स्वांसे मृतोरगम्॥ ३९
विप्रवर शौनकजी! शमीक मुनिने अपने पुत्रका रोना-चिल्लाना सुनकर धीरे-धीरे अपनी आँखें खोली और देखा कि उनके गलेमें एक मरा साँप पड़ा है ॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 173) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/18/39/