श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.40

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

विसृज्य पुत्रं पप्रच्छ वत्स कस्माद्धि रोदिषि।

केन वा तेऽपकृतमित्युक्तः स न्यवेदयत्॥ ४०

visṛjya putraṃ papraccha vatsa kasmāddhi rodiṣi|

kena vā te'pakṛtamityuktaḥ sa nyavedayat|| 40

अर्थ

उसे फेंककर उन्होंने अपने पुत्रसे पूछा—‘बेटा! तुम क्यों रो रहे हो? किसने तुम्हारा अपकार किया है?’ उनके इस प्रकार पूछनेपर बालकने सारा हाल कह दिया ॥ ४०॥

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