॥ श्रीहरिः ॥
अपापेषु स्वभृत्येषु बालेनापक्वबुद्धिना।
पापं कृतं तद्भगवान् सर्वात्मा क्षन्तुमर्हति॥ ४७
apāpeṣu svabhṛtyeṣu bālenāpakvabuddhinā|
pāpaṃ kṛtaṃ tadbhagavān sarvātmā kṣantumarhati|| 47
अर्थ
इस नासमझ बालकने हमारे निष्पाप सेवक राजाका अपराध किया है, सर्वात्मा भगवान् कृपा करके इसे क्षमा करें॥ ४७॥
अपापेषु स्वभृत्येषु बालेनापक्वबुद्धिना।
पापं कृतं तद्भगवान् सर्वात्मा क्षन्तुमर्हति॥ ४७
इस नासमझ बालकने हमारे निष्पाप सेवक राजाका अपराध किया है, सर्वात्मा भगवान् कृपा करके इसे क्षमा करें॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.18.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 174) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/18/47/