ब्राह्मणोंकी क्रोधाग्नि आज ही मेरे राज्य, सेना और भरे-पूरे खजानेको जलाकर खाक कर दे—जिससे फिर कभी मुझ दुष्टकी ब्राह्मण, देवता और गौओंके प्रति ऐसी पापबुद्धि न हो॥ ३॥
अद्यैव राज्यं बलमृद्धकोशं
प्रकोपितब्रह्मकुलानलो मे।
दहत्वभद्रस्य पुनर्न मेऽभूत्
पापीयसी धीर्द्विजदेवगोभ्यः॥ ३
ब्राह्मणोंकी क्रोधाग्नि आज ही मेरे राज्य, सेना और भरे-पूरे खजानेको जलाकर खाक कर दे—जिससे फिर कभी मुझ दुष्टकी ब्राह्मण, देवता और गौओंके प्रति ऐसी पापबुद्धि न हो॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.19.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 174) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/19/3/