chindanti kovidāstasya ko na kuryātkathāratim|| 15
अर्थ
कर्मोंकी गाँठ बड़ी कड़ी है। विचारवान् पुरुष भगवान्के चिन्तनकी तलवारसे उस गाँठको काट डालते हैं। तब भला, ऐसा कौन मनुष्य होगा, जो भगवान्की लीलाकथामें प्रेम न करे॥ १५॥✎ 26
यदनुध्यासिना युक्ताः कर्मग्रन्थिनिबन्धनम्।
छिन्दन्ति कोविदास्तस्य को न कुर्यात्कथारतिम्॥ १५
कर्मोंकी गाँठ बड़ी कड़ी है। विचारवान् पुरुष भगवान्के चिन्तनकी तलवारसे उस गाँठको काट डालते हैं। तब भला, ऐसा कौन मनुष्य होगा, जो भगवान्की लीलाकथामें प्रेम न करे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.2.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 86) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/2/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)