श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.2.15

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

यदनुध्यासिना युक्ताः कर्मग्रन्थिनिबन्धनम्।

छिन्दन्ति कोविदास्तस्य को न कुर्यात्कथारतिम्॥ १५

yadanudhyāsinā yuktāḥ karmagranthinibandhanam|

chindanti kovidāstasya ko na kuryātkathāratim|| 15

अर्थ

कर्मोंकी गाँठ बड़ी कड़ी है। विचारवान् पुरुष भगवान्‌के चिन्तनकी तलवारसे उस गाँठको काट डालते हैं। तब भला, ऐसा कौन मनुष्य होगा, जो भगवान्‌की लीलाकथामें प्रेम न करे॥ १५॥✎ 26

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #26 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें