॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.2.26
mumukṣavo ghorarūpān hitvā bhūtapatīnatha|
nārāyaṇakalāḥ śāntā bhajanti hyanasūyavaḥ|| 26
अर्थ
जो लोग इस संसारसागरसे पार जाना चाहते हैं, वे यद्यपि किसीकी निन्दा तो नहीं करते, न किसीमें दोष ही देखते हैं, फिर भी घोररूपवाले—तमोगुणी-रजोगुणी भैरवादि भूतपतियोंकी उपासना न करके सत्त्वगुणी विष्णुभगवान् और उनके अंश—कलास्वरूपोंका ही भजन करते हैं॥ २६॥
टिप्पणियाँ
- १
प्रा० पा०—कलां।
- २
प्रा० पा०—शान्तां।