श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.2.4

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।

देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥ ४

nārāyaṇaṃ namaskṛtya naraṃ caiva narottamam|

devīṃ sarasvatīṃ vyāsaṃ tato jayamudīrayet|| 4

अर्थ

मनुष्योंमें सर्वश्रेष्ठ भगवान्‌के अवतार नर-नारायण ऋषियोंको, सरस्वती देवीको और श्रीव्यासदेवजीको नमस्कार करके तब संसार और अन्तःकरणके समस्त विकारोंपर विजय प्राप्त करानेवाले इस श्रीमद्भागवतमहापुराणका पाठ करना चाहिये॥ ४॥✎ 1276

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1276 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-महापुराणका → श्रीमद्भागवतमहापुराणका

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