श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.2.7

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

वासुदेवे भगवति भक्तियोगः प्रयोजितः।

जनयत्याशु वैराग्यं ज्ञानं च यदहैतुकम्॥ ७

vāsudeve bhagavati bhaktiyogaḥ prayojitaḥ|

janayatyāśu vairāgyaṃ jñānaṃ ca yadahaitukam|| 7

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णमें भक्ति होते ही, अनन्य प्रेमसे उनमें चित्त जोड़ते ही निष्काम ज्ञान और वैराग्यका आविर्भाव हो जाता है॥ ७॥✎ 25

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #25 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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