श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.13

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अष्टमे मेरुदेव्यां तु नाभेर्जात उरुक्रमः।

दर्शयन् वर्त्म धीराणां सर्वाश्रमनमस्कृतम्॥ १३

aṣṭame merudevyāṃ tu nābherjāta urukramaḥ|

darśayan vartma dhīrāṇāṃ sarvāśramanamaskṛtam|| 13

अर्थ

राजा नाभिकी पत्‍नी मेरु देवीके गर्भसे ऋषभदेवके रूपमें भगवान्‌ने आठवाँ अवतार ग्रहण किया। इस रूपमें उन्होंने परमहंसोंका वह मार्ग, जो सभी आश्रमियोंके लिये वन्दनीय है, दिखाया॥ १३॥✎ 30 31

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #30 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #31 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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