सातवीं बार रुचि प्रजापतिकी आकूति नामक पत्नीसे यज्ञके रूपमें उन्होंने अवतार ग्रहण किया और अपने पुत्र याम आदि देवताओंके साथ स्वायम्भुव मन्वन्तरकी रक्षा की॥ १२॥✎ 29
ततः सप्तम आकूत्यां रुचेर्यज्ञोऽभ्यजायत।
स यामाद्यैः सुरगणैरपात्स्वायम्भुवान्तरम्॥ १२
सातवीं बार रुचि प्रजापतिकी आकूति नामक पत्नीसे यज्ञके रूपमें उन्होंने अवतार ग्रहण किया और अपने पुत्र याम आदि देवताओंके साथ स्वायम्भुव मन्वन्तरकी रक्षा की॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 89) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/3/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)