अनसूयाके वर माँगनेपर छठे अवतारमें वे अत्रिकी सन्तान—दत्तात्रेय हुए। इस अवतारमें उन्होंने अलर्क एवं प्रह्लाद आदिको ब्रह्मज्ञानका उपदेश किया॥ ११॥✎ 29
षष्ठे अत्रेरपत्यत्वं वृतः प्राप्तोऽनसूयया।
आन्वीक्षिकीमलर्काय प्रह्रादादिभ्य ऊचिवान्॥ ११
अनसूयाके वर माँगनेपर छठे अवतारमें वे अत्रिकी सन्तान—दत्तात्रेय हुए। इस अवतारमें उन्होंने अलर्क एवं प्रह्लाद आदिको ब्रह्मज्ञानका उपदेश किया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 89) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/3/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)