पाँचवें अवतारमें वे सिद्धोंके स्वामी कपिलके रूपमें प्रकट हुए और तत्त्वोंका निर्णय करनेवाले सांख्य-शास्त्रका, जो समयके फेरसे लुप्त हो गया था, आसुरि नामक ब्राह्मणको उपदेश किया॥ १०॥✎ 29
पञ्चमः कपिलो नाम सिद्धेशः कालविप्लुतम्।
प्रोवाचासुरये सांख्यं तत्त्वग्रामविनिर्णयम्॥ १०
पाँचवें अवतारमें वे सिद्धोंके स्वामी कपिलके रूपमें प्रकट हुए और तत्त्वोंका निर्णय करनेवाले सांख्य-शास्त्रका, जो समयके फेरसे लुप्त हो गया था, आसुरि नामक ब्राह्मणको उपदेश किया॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 89) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/3/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)