श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.27

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ऋषयो मनवो देवा मनुपुत्रा महौजसः।

कलाः सर्वे हरेरेव सप्रजापतयस्तथा॥ २७

ṛṣayo manavo devā manuputrā mahaujasaḥ|

kalāḥ sarve harereva saprajāpatayastathā|| 27

अर्थ

ऋषि, मनु, देवता, प्रजापति, मनुपुत्र और जितने भी महान् शक्तिशाली हैं, वे सब-के-सब भगवान्‌के ही अंश हैं॥ २७॥

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