वे तो पाण्डव-वंशके गौरव बढ़ानेवाले सम्राट् थे। वे भला, किस कारणसे साम्राज्यलक्ष्मीका परित्याग करके गंगातटपर मृत्युपर्यन्त अनशनका व्रत लेकर बैठे थे?॥ १०॥✎ 12781279
स सम्राट् कस्य वा हेतोः पाण्डूनां मानवर्धनः।
प्रायोपविष्टो गङ्गायामनादृत्याधिराट्श्रियम्॥ १०
वे तो पाण्डव-वंशके गौरव बढ़ानेवाले सम्राट् थे। वे भला, किस कारणसे साम्राज्यलक्ष्मीका परित्याग करके गंगातटपर मृत्युपर्यन्त अनशनका व्रत लेकर बैठे थे?॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.4.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 94) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/4/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1278 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पाण्डव-नन्दन → पाण्डवनन्दन
#1279 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नगर-वासियोंने → नगरवासियोंने