श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.9

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अभिमन्युसुतं सूत प्राहुर्भागवतोत्तमम्।

तस्य जन्म महाश्‍चर्यं कर्माणि च गृणीहि नः॥ ९

abhimanyusutaṃ sūta prāhurbhāgavatottamam|

tasya janma mahāścaryaṃ karmāṇi ca gṛṇīhi naḥ|| 9

अर्थ

सूतजी! हमने सुना है कि अभिमन्युनन्दन परीक्षित् भगवान्‌के बड़े प्रेमी भक्त थे। उनके अत्यन्त आश्‍चर्यमय जन्म और कर्मोंका भी वर्णन कीजिये॥ ९॥✎ 1278 1279

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1278 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पाण्डव-नन्दन → पाण्डवनन्दन
  • #1279 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नगर-वासियोंने → नगरवासियोंने

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