॥ श्रीहरिः ॥
द्वापरे समनुप्राप्ते तृतीये युगपर्यये।
जातः पराशराद्योगी वासव्यां कलया हरेः॥ १४
dvāpare samanuprāpte tṛtīye yugaparyaye|
jātaḥ parāśarādyogī vāsavyāṃ kalayā hareḥ|| 14
अर्थ
सूतजीने कहा—इस वर्तमान चतुर्युगीके तीसरे युग द्वापरमें महर्षि पराशरके द्वारा वसुकन्या सत्यवतीके गर्भसे भगवान्के कलावतार योगिराज व्यासजीका जन्म हुआ॥ १४॥
द्वापरे समनुप्राप्ते तृतीये युगपर्यये।
जातः पराशराद्योगी वासव्यां कलया हरेः॥ १४
सूतजीने कहा—इस वर्तमान चतुर्युगीके तीसरे युग द्वापरमें महर्षि पराशरके द्वारा वसुकन्या सत्यवतीके गर्भसे भगवान्के कलावतार योगिराज व्यासजीका जन्म हुआ॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.4.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 95) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/4/14/