एक दिन वे सूर्योदयके समय सरस्वतीके पवित्र जलमें स्नानादि करके एकान्त पवित्र स्थानपर बैठे हुए थे॥ १५॥
स कदाचित्सरस्वत्या उपस्पृश्य जलं शुचिः।
विविक्तदेश आसीन उदिते रविमण्डले॥ १५
एक दिन वे सूर्योदयके समय सरस्वतीके पवित्र जलमें स्नानादि करके एकान्त पवित्र स्थानपर बैठे हुए थे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.4.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 95) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/4/15/