श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.23

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

त एत ऋषयो वेदं स्वं स्वं व्यस्यन्‍ननेकधा।

शिष्यैः प्रशिष्यैस्तच्छिष्यैर्वेदास्ते शाखिनोऽभवन्॥ २३

ta eta ṛṣayo vedaṃ svaṃ svaṃ vyasyannanekadhā|

śiṣyaiḥ praśiṣyaistacchiṣyairvedāste śākhino'bhavan|| 23

अर्थ

इन पूर्वोक्त ऋषियोंने अपनी-अपनी शाखाको और भी अनेक भागोंमें विभक्त कर दिया। इस प्रकार शिष्य, प्रशिष्य और उनके शिष्योंद्वारा वेदोंकी बहुत-सी शाखाएँ बन गयीं॥ २३॥

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