श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.4.22

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अथर्वाङ्गिरसामासीत्सुमन्तुर्दारुणो मुनिः।✎ 1880

इतिहासपुराणानां पिता मे रोमहर्षणः॥ २२

atharvāṅgirasāmāsītsumanturdāruṇo muniḥ|

itihāsapurāṇānāṃ pitā me romaharṣaṇaḥ|| 22

अर्थ

अथर्ववेदमें प्रवीण हुए दरुणनन्दन सुमन्तु मुनि। इतिहास और पुराणोंके स्नातक मेरे पिता रोमहर्षण थे॥ २२॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1880 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अथर्वाङ्गिगरसा → अथर्वाङ्गिरसा

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