‘प्रभो! आप भगवान् श्रीवासुदेवको नमस्कार है। हम आपका ध्यान करते हैं। प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और संकर्षणको भी नमस्कार है’॥ ३७॥✎ 505152
नमो भगवते तुभ्यं वासुदेवाय धीमहि।
प्रद्युम्नायानिरुद्धाय नमः सङ्कर्षणाय च॥ ३७
‘प्रभो! आप भगवान् श्रीवासुदेवको नमस्कार है। हम आपका ध्यान करते हैं। प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और संकर्षणको भी नमस्कार है’॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 101) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/5/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)