yenaivāsau na tuṣyeta manye taddarśanaṃ khilam|| 8
अर्थ
नारदजीने कहा—व्यासजी! आपने भगवान्के निर्मल यशका गान प्रायः नहीं किया। मेरी ऐसी मान्यता है कि जिससे भगवान् संतुष्ट नहीं होते, वह शास्त्र या ज्ञान अधूरा है॥ ८॥✎ 4041424344454615711572
भवतानुदितप्रायं यशो भगवतोऽमलम्।
येनैवासौ न तुष्येत मन्ये तद्दर्शनं खिलम्॥ ८
नारदजीने कहा—व्यासजी! आपने भगवान्के निर्मल यशका गान प्रायः नहीं किया। मेरी ऐसी मान्यता है कि जिससे भगवान् संतुष्ट नहीं होते, वह शास्त्र या ज्ञान अधूरा है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 98) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/5/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (9)