श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.13

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

यदा मृधे कौरवसृञ्जयानां वीरेष्वथो वीरगतिं गतेषु।

वृकोदराविद्धगदाभिमर्शभग्नोरुदण्डे धृतराष्ट्रपुत्रे॥ १३ ✎ 1506

yadā mṛdhe kauravasṛñjayānāṃ vīreṣvatho vīragatiṃ gateṣu|

vṛkodarāviddhagadābhimarśabhagnorudaṇḍe dhṛtarāṣṭraputre|| 13

अर्थ

जिस समय महाभारतयुद्धमें कौरव और पाण्डव दोनों पक्षोंके बहुत-से वीर वीरगतिको प्राप्त हो चुके थे और भीमसेनकी गदाके प्रहारसे दुर्योधनकी जाँघ टूट चुकी थी, तब अश्‍वत्थामाने अपने स्वामी दुर्योधनका प्रिय कार्य समझकर द्रौपदीके सोते हुए पुत्रोंके सिर काटकर उसे भेंट किये, यह घटना दुर्योधनको भी अप्रिय ही लगी; क्योंकि ऐसे नीच कर्मकी सभी निन्दा करते हैं॥ १३-१४॥

यह अर्थ श्लोक 13–14 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1506 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वृकोदराविद्धगदाभिमर्श- भग्नोरुदण्डे → वृकोदराविद्धगदाभिमर्शभग्नोरुदण्डे

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