संस्थां च पाण्डुपुत्राणां वक्ष्ये कृष्णकथोदयम्॥ १२
parīkṣito'tha rājarṣerjanmakarmavilāpanam|
saṃsthāṃ ca pāṇḍuputrāṇāṃ vakṣye kṛṣṇakathodayam|| 12
अर्थ
शौनकजी! अब मैं राजर्षि परीक्षित्के जन्म, कर्म और मोक्षकी तथा पाण्डवोंके स्वर्गारोहणकी कथा कहता हूँ; क्योंकि इन्हींसे भगवान् श्रीकृष्णकी अनेकों कथाओंका उदय होता है॥ १२॥
परीक्षितोऽथ राजर्षेर्जन्मकर्मविलापनम्।
संस्थां च पाण्डुपुत्राणां वक्ष्ये कृष्णकथोदयम्॥ १२
शौनकजी! अब मैं राजर्षि परीक्षित्के जन्म, कर्म और मोक्षकी तथा पाण्डवोंके स्वर्गारोहणकी कथा कहता हूँ; क्योंकि इन्हींसे भगवान् श्रीकृष्णकी अनेकों कथाओंका उदय होता है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 108) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/7/12/