यद्यपि उसे ब्रह्मास्त्रको लौटानेकी विधि मालूम न थी, फिर भी प्राणसंकट देखकर उसने आचमन किया और ध्यानस्थ होकर ब्रह्मास्त्रका सन्धान किया॥ २०॥
अथोपस्पृश्य सलिलं संदधे तत्समाहितः।
अजानन्नुपसंहारं प्राणकृच्छ्र उपस्थिते॥ २०
यद्यपि उसे ब्रह्मास्त्रको लौटानेकी विधि मालूम न थी, फिर भी प्राणसंकट देखकर उसने आचमन किया और ध्यानस्थ होकर ब्रह्मास्त्रका सन्धान किया॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 109) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/7/20/