उस अस्त्रसे सब दिशाओंमें एक बड़ा प्रचण्ड तेज फैल गया। अर्जुनने देखा कि अब तो मेरे प्राणोंपर ही आ बनी है, तब उन्होंने श्रीकृष्णसे प्रार्थना की॥ २१॥
ततः प्रादुष्कृतं तेजः प्रचण्डं सर्वतोदिशम्।
प्राणापदमभिप्रेक्ष्य विष्णुं जिष्णुरुवाच ह॥ २१
उस अस्त्रसे सब दिशाओंमें एक बड़ा प्रचण्ड तेज फैल गया। अर्जुनने देखा कि अब तो मेरे प्राणोंपर ही आ बनी है, तब उन्होंने श्रीकृष्णसे प्रार्थना की॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 109) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/7/21/