उस आगसे प्रजाका और लोकोंका नाश होते देखकर भगवान्की अनुमतिसे अर्जुनने उन दोनोंको ही लौटा लिया॥ ३२॥✎ 666768
प्रजोपप्लवमालक्ष्य लोकव्यतिकरं च तम्।
मतं च वासुदेवस्य संजहारार्जुनो द्वयम्॥ ३२
उस आगसे प्रजाका और लोकोंका नाश होते देखकर भगवान्की अनुमतिसे अर्जुनने उन दोनोंको ही लौटा लिया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 110) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/7/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)