आत्मनोऽभिमुखान्दीप्तानालक्ष्यास्त्राण्युपाददुः॥ १२
tarhyevātha muniśreṣṭha pāṇḍavāḥ pañca sāyakān|
ātmano'bhimukhāndīptānālakṣyāstrāṇyupādaduḥ|| 12
अर्थ
शौनकजी! उसी समय पाण्डवोंने भी देखा कि जलते हुए पाँच बाण हमारी ओर आ रहे हैं। इसलिये उन्होंने भी अपने-अपने अस्त्र उठा लिये॥ १२॥
तर्ह्येवाथ मुनिश्रेष्ठ पाण्डवाः पञ्च सायकान्।
आत्मनोऽभिमुखान्दीप्तानालक्ष्यास्त्राण्युपाददुः॥ १२
शौनकजी! उसी समय पाण्डवोंने भी देखा कि जलते हुए पाँच बाण हमारी ओर आ रहे हैं। इसलिये उन्होंने भी अपने-अपने अस्त्र उठा लिये॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.8.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 114) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/8/12/