श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.13

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

व्यसनं वीक्ष्य तत्तेषामनन्यविषयात्मनाम्।

सुदर्शनेन स्वास्त्रेण स्वानां रक्षां व्यधाद्विभुः॥ १३

vyasanaṃ vīkṣya tatteṣāmananyaviṣayātmanām|

sudarśanena svāstreṇa svānāṃ rakṣāṃ vyadhādvibhuḥ|| 13

अर्थ

सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णने अपने अनन्य प्रेमियोंपर—शरणागत भक्तोंपर बहुत बड़ी विपत्ति आयी जानकर अपने निज अस्त्र सुदर्शनचक्रसे उन निज जनोंकी रक्षा की॥ १३॥

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