पाण्डव बड़े विनय और प्रेमके साथ भीष्मपितामहके पास बैठ गये। उन्हें देखकर भीष्मपितामहकी आँखें प्रेमके आँसुओंसे भर गयीं। उन्होंने उनसे कहा—॥ ११॥✎ 1575
पाण्डुपुत्रानुपासीनान् प्रश्रयप्रेमसङ्गतान्।
अभ्याचष्टानुरागास्रैरन्धीभूतेन चक्षुषा॥ ११
पाण्डव बड़े विनय और प्रेमके साथ भीष्मपितामहके पास बैठ गये। उन्हें देखकर भीष्मपितामहकी आँखें प्रेमके आँसुओंसे भर गयीं। उन्होंने उनसे कहा—॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.9.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 120) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/9/11/