श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.25

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सूत उवाच

युधिष्ठिरस्तदाकर्ण्य शयानं शरपञ्जरे।

अपृच्छद्विविधान्धर्मानृषीणां चानुशृण्वताम्॥ २५

yudhiṣṭhirastadākarṇya śayānaṃ śarapañjare|

apṛcchadvividhāndharmānṛṣīṇāṃ cānuśṛṇvatām|| 25

अर्थ

सूतजी कहते हैं—युधिष्ठिरने उनकी यह बात सुनकर शरशय्यापर सोये हुए भीष्मपितामहसे बहुत-से ऋषियोंके सामने ही नाना प्रकारके धर्मोंके सम्बन्धमें अनेकों रहस्य पूछे॥ २५॥

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