श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

देहं मानुषमाश्रित्य कति वर्षाणि वृष्णिभिः।

यदुपुर्यां सहावात्सीत् पत्‍न्यः कत्यभवन् प्रभोः॥ ११

dehaṃ mānuṣamāśritya kati varṣāṇi vṛṣṇibhiḥ|

yadupuryāṃ sahāvātsīt patnyaḥ katyabhavan prabhoḥ|| 11

अर्थ

मनुष्याकार सच्चिदानन्दमय विग्रह प्रकट करके द्वारकापुरीमें यदुवंशियोंके साथ उन्होंने कितने वर्षोंतक निवास किया? और उन सर्वशक्तिमान् प्रभुकी पत्‍नियाँ कितनी थीं?॥ ११॥

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