श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

वासुदेवकथाप्रश्‍नः पुरुषांस्त्रीन् पुनाति हि।

वक्तारं पृच्छकं श्रोतॄंस्तत्पादसलिलं यथा॥ १६

vāsudevakathāpraśnaḥ puruṣāṃstrīn punāti hi|

vaktāraṃ pṛcchakaṃ śrotṝṃstatpādasalilaṃ yathā|| 16

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णकी कथाके सम्बन्धमें प्रश्‍न करनेसे ही वक्ता, प्रश्‍नकर्ता और श्रोता तीनों ही पवित्र हो जाते हैं—जैसे गंगाजीका जल या भगवान् शालग्रामका चरणामृत सभीको पवित्र कर देता है॥ १६॥

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