श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

भूमिर्दृप्तनृपव्याजदैत्यानीकशतायुतैः ।

आक्रान्ता भूरिभारेण ब्रह्माणं शरणं ययौ॥ १७

bhūmirdṛptanṛpavyājadaityānīkaśatāyutaiḥ |

ākrāntā bhūribhāreṇa brahmāṇaṃ śaraṇaṃ yayau|| 17

अर्थ

परीक्षित्! उस समय लाखों दैत्योंके दलने घमंडी राजाओंका रूप धारण कर अपने भारी भारसे पृथ्वीको आक्रान्त कर रखा था। उससे त्राण पानेके लिये वह ब्रह्माजीकी शरणमें गयी॥ १७॥

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