श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

वसुदेवगृहे साक्षाद् भगवान् पुरुषः परः।

जनिष्यते२ तत्प्रियार्थं सम्भवन्तु ३ सुरस्त्रियः॥ २३

vasudevagṛhe sākṣād bhagavān puruṣaḥ paraḥ|

janiṣyate tatpriyārthaṃ sambhavantu surastriyaḥ|| 23

अर्थ

वसुदेवजीके घर स्वयं पुरुषोत्तम भगवान् प्रकट होंगे। उनकी और उनकी प्रियतमा (श्रीराधा) की सेवाके लिये देवांगनाएँ जन्म ग्रहण करें॥ २३॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    ष्यति।

    (मुद्रित पृष्ठ 122)
  2. ३

    वन्त्वमरस्त्रियः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 122)

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