एक बार मथुरामें शूरके पुत्र वसुदेवजी विवाह करके अपनी नवविवाहिता पत्नी देवकीके साथ घर जानेके लिये रथपर सवार हुए॥ २९॥✎ 8821651
तस्यां तु कर्हिचिच्छौरिर्वसुदेवः कृतोद्वहः।
देवक्या सूर्यया सार्धं प्रयाणे रथमारुहत्॥ २९
एक बार मथुरामें शूरके पुत्र वसुदेवजी विवाह करके अपनी नवविवाहिता पत्नी देवकीके साथ घर जानेके लिये रथपर सवार हुए॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 123) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/1/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)