श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

चतुःशतं पारिबर्हं गजानां हेममालिनाम्।

अश्‍वानामयुतं सार्धं रथानां च त्रिषट्शतम्॥ ३१

catuḥśataṃ pāribarhaṃ gajānāṃ hemamālinām|

aśvānāmayutaṃ sārdhaṃ rathānāṃ ca triṣaṭśatam|| 31

अर्थ

देवकीके पिता थे देवक। अपनी पुत्रीपर उनका बड़ा प्रेम था। कन्याको विदा करते समय उन्होंने उसे सोनेके हारोंसे अलंकृत चार सौ हाथी, पंद्रह हजार घोड़े, अठारह सौ रथ तथा सुन्दर-सुन्दर वस्त्राभूषणोंसे विभूषित दो सौ सुकुमारी दासियाँ दहेजमें दीं॥ ३१-३२॥✎ 882 1651

यह अर्थ श्लोक 31–32 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #882 शब्दोंके बीचका स्थान: ३५॥वह → ३५॥ वह
  • #1651 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वस्त्रा-भूषणोंसे → वस्त्राभूषणोंसे

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