कंस बड़ा पापी था। उसकी दुष्टताकी सीमा नहीं थी। वह भोजवंशका कलंक ही था। आकाशवाणी सुनते ही उसने तलवार खींच ली और अपनी बहिनकी चोटी पकड़कर उसे मारनेके लिये तैयार हो गया॥ ३५॥✎ 8821651
इत्युक्तः स खलः पापो भोजानां कुलपांसनः।
भगिनीं हन्तुमारब्धः खड्गपाणिः कचेऽग्रहीत्॥ ३५
कंस बड़ा पापी था। उसकी दुष्टताकी सीमा नहीं थी। वह भोजवंशका कलंक ही था। आकाशवाणी सुनते ही उसने तलवार खींच ली और अपनी बहिनकी चोटी पकड़कर उसे मारनेके लिये तैयार हो गया॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 123) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/1/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)