॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.1.54
वसुदेव उवाच
न ह्यस्यास्ते भयं सौम्य यद् वागाहाशरीरिणी।
पुत्रान् समर्पयिष्येऽस्या यतस्ते भयमुत्थितम्॥ ५४
na hyasyāste bhayaṃ saumya yad vāgāhāśarīriṇī|
putrān samarpayiṣye'syā yataste bhayamutthitam|| 54
अर्थ
वसुदेवजीने कहा—सौम्य! आपको देवकीसे तो कोई भय है नहीं, जैसा कि आकाशवाणीने कहा है । भय है पुत्रोंसे, सो इसके पुत्र मैं आपको लाकर सौंप दूँगा॥ ५४॥