श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

फलविक्रयिणी तस्य च्युतधान्यं करद्वयम्।

फलैरपूरयद् रत्‍नैः फलभाण्डमपूरि च॥ ११

phalavikrayiṇī tasya cyutadhānyaṃ karadvayam|

phalairapūrayad ratnaiḥ phalabhāṇḍamapūri ca|| 11

अर्थ

उनकी अँजुलिमेंसे अनाज तो रास्तेमें ही बिखर गया, पर फल बेचनेवालीने उनके दोनों हाथ फलसे भर दिये। इधर भगवान्‌ने भी उसकी फल रखनेवाली टोकरी रत्‍नोंसे भर दी॥ ११॥

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